क्या चुनाव में बने रहेंगे संजय अग्रवाल? संभावनाओं पर प्रतिद्वंद्वी विनय मित्तल की कड़ी आपत्ति || आज हो रही चैंबर चुनाव समिति की बैठक पर लगीं निगाहें
आगरा, 28 फरवरी। नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स आगरा की आज शुक्रवार को दोपहर ढाई बजे से होने जा रही चुनाव समिति की पुनर्समीक्षा बैठक पर सभी प्रत्याशियों की निगाहें लग गई हैं। इस बैठक में पूर्व में कोषाध्यक्ष पद के एक प्रत्याशी के बारे में लिए गए निर्णय पर पुनर्विचार प्रस्तावित है।
गौरतलब है कि विगत 25 फरवरी को चुनाव समिति ने नामांकन पत्रों की जांच करते हुए कोषाध्यक्ष पद के प्रत्याशी संजय अग्रवाल और कार्यकारिणी सदस्य के दो प्रत्याशियों का नामांकन पत्र अयोग्य घोषित कर दिए थे। कोषाध्यक्ष पद पर केवल विनय मित्तल का नामांकन सही पाया गया था। इस निर्णय के बाद चैंबर की राजनीति में भूचाल आ गया। एक पक्ष जहां संजय अग्रवाल को योग्य ठहराने में जुट गया, वहीं दूसरा पक्ष केवल विनय मित्तल को ही योग्य बताने पर जोर देने लगा। चुनाव समिति के सदस्यों में भी इस विषय पर बिखराव नजर आया।
संजय अग्रवाल ने अगले दिन चुनाव समिति के समक्ष अपना पक्ष रखकर बताया कि उनकी ओर से कोई गलती नहीं हुई है, चैंबर के तत्कालीन अधिकारी ने जो कागज या शुल्क जमा करने को कहा था वे जमा कर दिए। वह पिछली दो बार से मतदाता सूची में भी शामिल रहे हैं।
इधर चुनाव समिति ने कहा कि शुल्क कम जमा किया गया। इस पर संजय ने विगत दिवस अवशेष राशि भी चैंबर में जमा करा दी। बदली हुई परिस्थितियों में पुनर्विचार के लिए शुक्रवार को बैठक करना तय किया गया।
संजय अग्रवाल को पुनः योग्य घोषित किए जाने की संभावनाओं को देखते हुए कोषाध्यक्ष पद के उनके प्रतिद्वंद्वी विनय अग्रवाल भी सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने "न्यूज नजरिया" से इस संभावित निर्णय को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। विनय का कहना है कि एक बार पूरी चुनाव समिति उन्हें अकेले को कोषाध्यक्ष पद के लिए योग्य घोषित कर चुकी तो फिर इस पर पुनर्विचार क्यों किया जा रहा है। ऐसा तो कहीं नहीं होता है। उन्होंने नामांकन पत्रों की जांच की तिथि निकलने के बाद संजय अग्रवाल से शुल्क जमा कराए जाने का भी कड़ा विरोध किया। निर्णय बदले जाने पर उसे चुनौती देने की धमकी भी दी।
दूसरी ओर चुनाव समिति के अध्यक्ष प्रदीप वार्ष्णेय का कहना है कि चुनाव समिति को पुनर्समीक्षा करने का अधिकार है। संजय अग्रवाल द्वारा कम शुल्क जमा कराया जाना चैंबर की गलती थी न कि प्रत्याशी की। संजय ने अवशेष शुल्क जमा करा दिया है। निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है कि चैंबर की गलती से किसी प्रत्याशी का नुकसान न हो। इसीलिए पुनर्विचार बैठक बुलाई गई है। चैंबर की गलती पाए जाने के बाद विजय बंसल और मुरारीलाल गोयल के नामांकन पत्र भी स्वीकार कर लिए गए हैं।
वार्ष्णेय ने कहा कि यदि कोई प्रत्याशी पुनर्विचार बैठक के निर्णय से संतुष्ट नहीं होता है तो वह सूची चस्पा होने के बाद चौबीस घंटे के भीतर कोर कमेटी में अपील कर सकता है।
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